3 लाख रुपये किलो तक की कीमत वाला मियाजाकी आम अब बस्तर की नई पहचान
जगदलपुर/बस्तर। छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र, जो कभी नक्सलवाद और संघर्ष की खबरों के कारण चर्चा में रहता था, अब कृषि और बागवानी के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। यहां अब दुनिया के सबसे महंगे और दुर्लभ आमों में गिने जाने वाले मियाजाकी आम की सफल खेती किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है।
बस्तर के किसान संपत झा ने अपने बगीचे में विभिन्न किस्मों के आम के पौधों के साथ मियाजाकी आम के पौधे भी लगाए थे। करीब चार वर्षों की मेहनत, देखभाल और उचित प्रबंधन के बाद पौधों में फल लगना शुरू हुआ। वर्तमान में उनके बगीचे में मियाजाकी आम के पेड़ अच्छी तरह विकसित हो चुके हैं और फल भी दे रहे हैं।
मियाजाकी आम जापान की विशेष किस्म माना जाता है। यह अपने आकर्षक रंग, बेहतरीन स्वाद, सुगंध और पोषक गुणों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी मांग रखता है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार इसकी कीमत वैश्विक बाजार में ढाई से तीन लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है।
किसान संपत झा का कहना है कि बस्तर की जलवायु और मिट्टी इस किस्म की खेती के लिए अनुकूल साबित हुई है। इससे भविष्य में क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी नई संभावनाएं खुल सकती हैं। उनका मानना है कि यदि उचित बाजार और तकनीकी सहयोग मिले तो मियाजाकी आम की खेती किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
किसानों ने सरकार से मांग की है कि इस विशेष आम के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विपणन की व्यवस्था की जाए, ताकि उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी बल्कि बस्तर को भी वैश्विक पहचान मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि बस्तर की इमली, महुआ, अमचूर और अन्य वनोपज पहले से ही अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके हैं। अब मियाजाकी आम की खेती क्षेत्र को कृषि नवाचार और उच्च मूल्य वाली बागवानी के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।













0 टिप्पणियाँ