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बजट में सिर्फ मोदी सरकार की आंकड़ों की बाज़ीगरी और जुमलों की राजनीति-देवलाल नरेटी,कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, आप

बजट में जनता की थाली पर वार, पूंजीपतियों को वरदान-उत्तम जायसवाल, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष,आप

बजट में सिर्फ मोदी सरकार की आंकड़ों की बाज़ीगरी और जुमलों की राजनीति-देवलाल नरेटी,कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, आप

बजट में सरकार ने किसानों की पीठ में छुरा घोंपा है-अभिषेक मिश्रा,कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष,आप

रायपुर, 1 फरवरी 2026।केंद्रीय बजट 2026 को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्र की मोदी सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उत्तम जायसवाल ने इस बजट को *“आम जनता के सपनों का गला घोंटने वाला दस्तावेज़”* बताया उन्होंने कहा कि यह बजट किसानों, मजदूरों, युवाओं और मध्यम वर्ग की उम्मीदों को कुचलकर बड़े उद्योगपतियों और चुनिंदा कॉर्पोरेट घरानों को खुली छूट देने का ऐलान है। सरकार ने महंगाई, बेरोजगारी और गिरती आमदनी जैसे जमीनी मुद्दों पर आंखें मूंदकर एक बार फिर “चमकदार शब्दों और भारी-भरकम आंकड़ों” के पीछे सच्चाई छिपाने की कोशिश की है।

 “यह बजट नहीं,चुनावी स्क्रिप्ट है” 

उन्होंने कहा कि बजट 2026 को “जनता की जरूरतों से कटे हुए, चुनावी मंच के लिए लिखी गई स्क्रिप्ट” करार दिया। सरकार ने असली सुधारों की जगह प्रचार और आंकड़ों के दम पर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की है।

 “महंगाई की आग में घी डालने वाला बजट” 

कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष देवलाल नरेटी ने कहा कि आज आम आदमी रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल, दूध, दाल और सब्जियों की बढ़ती कीमतों से त्रस्त है, लेकिन बजट 2026 में इन पर सीधी राहत का कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया। सरकार ने टैक्स राहत के नाम पर जो दिखावटी घोषणाएं की हैं, वे महंगाई की मार झेल रहे परिवारों के लिए “ऊंट के मुंह में जीरा” साबित होंगी।

 “युवाओं के भविष्य से खिलवाड़” 

देवलाल नरेटी ने बजट को *“युवा विरोधी और रोजगार शून्य”* करार देते हुए कहा कि देश का नौजवान नौकरी के लिए दर-दर भटक रहा है, लेकिन सरकार स्टार्टअप और स्किल डेवलपमेंट के पुराने नारों को दोहराकर अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थायी रोजगार सृजन के लिए कोई ठोस रोडमैप नहीं है और सरकारी भर्तियों पर चुप्पी साधी गई है।

 “किसानों की पीठ में छुरा” 

प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा का कहना है कि बजट 2026 ने एक बार फिर अन्नदाता को ठगा है। MSP की कानूनी गारंटी, सस्ती कृषि ऋण व्यवस्था और फसल बीमा में सुधार जैसे अहम मुद्दों को नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सहकारी संस्थाओं और ग्रामीण विकास के नाम पर की गई घोषणाएं सिर्फ कागजों की शोभा बढ़ाने के लिए हैं, ज़मीन पर इनका कोई असर नहीं दिखेगा।

“कानून में नरमी,जवाबदेही की हत्या”

उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रिया को आसान बनाने और पेनल्टी कम करने के फैसलों को “बड़े व्यापारिक घरानों के लिए खुला न्योता” बताया। उनका आरोप है कि इससे आम नागरिक को राहत मिलने के बजाय प्रभावशाली और रसूखदार लोगों को फायदा होगा, जबकि भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया।

  “कॉर्पोरेट मेहरबानी,आम आदमी की अनदेखी”  

उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट और बड़े निवेशकों के लिए नियमों में सहूलियत दिखाई दे रही है, लेकिन मध्यम वर्ग के लिए सस्ते आवास, किरायेदारों के अधिकार और शहरी गरीबों की हाउसिंग योजनाएं बजट में गायब हैं। यह बजट *“अमीरों के लिए लाल कालीन और गरीबों के लिए कांटों भरा रास्ता” तैयार करता है।

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