राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर पंडुम में जनजातीय संस्कृति की भव्य प्रदर्शनी का किया अवलोकन
आदिवासी विरासत को वैश्विक पहचान देने वाला ऐतिहासिक आयोजन बताया
बस्तर पंडुम 2026 के भव्य शुभारंभ समारोह में शामिल होने पहुंचीं राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने लालबाग मैदान में आयोजित जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं पर आधारित विशाल प्रदर्शनी का गहन अवलोकन किया। उन्होंने बस्तर की समृद्ध आदिवासी विरासत की खुलकर प्रशंसा करते हुए इसे देश की अनमोल धरोहर बताया और कहा कि यह आयोजन आदिवासी संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है।
एक-एक स्टॉल का किया निरीक्षण, कारीगरों से की बातचीत
राष्ट्रपति ने प्रदर्शनी में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण किया और स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों तथा आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधियों से संवाद कर उनकी कला, तकनीक और जीवनशैली को समझा। इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से निम्न कलाओं का अवलोकन किया—
- ढोकरा कला प्राचीन जनजातीय धातु शिल्प
- टेराकोटा कला – लोक आस्था व ग्रामीण जीवन पर आधारित मिट्टी की आकृतियां
- वुड कार्विंग (लकड़ी नक्काशी) – सागौन, साल, बीजा व सिवनर लकड़ी से बनी कलाकृतियां
- सीसल (जूट) कला – पारंपरिक हस्तशिल्प
- बांस शिल्प – दैनिक उपयोग व सजावट की वस्तुएं
- जनजातीय आभूषण व वेशभूषा – चांदी, मोती व शंख से निर्मित पारंपरिक गहने
- तुम्बा कला – लौकी से बने वाद्य यंत्र व सजावटी वस्तुएं
- बस्तर की जनजातीय चित्रकला – प्रकृति, पर्व-त्योहार और लोकजीवन पर आधारित चित्र
- दंडामी माढ़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा व हल्बा संस्कृति की झलक
प्रदर्शनी में बस्तर की प्रमुख जनजातियों— दंडामी माढ़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा और हल्बा — के युवक-युवतियों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों का सजीव प्रदर्शन किया, जिसने सभी दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
जनजातीय व्यंजनों ने मोहा मन
स्थानीय व्यंजन स्टॉल पर राष्ट्रपति ने पारंपरिक आदिवासी खाद्य पदार्थों का अवलोकन किया, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे—
- जोंधरी लाई के लड्डू
- मंडिया पेज
- कुलथी दाल
- आमट, चापड़ा चटनी, भेंडा चटनी
- तीखुर, पान बोबो
- पारंपरिक पेय लांदा और सल्फी
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने प्रदर्शनी परिसर में स्थापित देवगुड़ी में बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी की छायाचित्र के समक्ष शीश नवाया और देश की सुख-समृद्धि व शांति की कामना की।
मुख्यमंत्री व राज्यपाल भी रहे मौजूद
इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी उपस्थित रहे। उन्होंने भी जनजातीय कला, शिल्प, व्यंजन, औषधि, चित्रकला, वेशभूषा और लोक जीवन आधारित प्रदर्शनी की सराहना की।
















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