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जलसंसाधन विभाग -सौर सूक्ष्म सिंचाई योजना : काग़ज़ों में हरित क्रांति,ज़मीन पर ठेकेदारों की कमाई!

 सौर सूक्ष्म सिंचाई योजना : काग़ज़ों में हरित क्रांति,ज़मीन पर ठेकेदारों की कमाई!

मुंगेली/बिलासपुर।

अरपा,मनियारी,आगर और रहन नाला सहित अन्य नदी क्षेत्र में सौर सूक्ष्म सिंचाई योजना के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने की तैयारी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह योजना वाकई किसानों तक पानी पहुँचाएगी, या फिर यह भी सरकारी योजनाओं की लंबी सूची में एक और असफल प्रयोग साबित होगी?

शासन द्वारा स्वीकृत इस योजना में पाइपलाइन बिछाकर किसानों को सिंचाई सुविधा देने की बात कही जा रही है, पर ज़मीनी सच्चाई इससे बिल्कुल उलट दिखाई देती है।

पाइपलाइन से पानी या सिर्फ़ काग़ज़ी सप्लाई?

योजना के तहत एक जगह से लगभग 160 हेक्टेयर क्षेत्र में सोलर पंप, पाइपलाइन और ड्रिप/स्प्रिंकलर से सिंचाई का दावा किया गया है।

लेकिन विशेषज्ञों और स्थानीय किसानों का कहना है कि: इतनी बड़ी भूमि में समान और नियमित जल आपूर्ति व्यवहारिक नहीं है

अरपा नदी में गर्मी के महीनों में जलस्तर बेहद नीचे चला जाता है। ऐसे में सोलर पंप सालभर चल पाना लगभग असंभव है

तो सवाल उठता है—

👉 क्या यह योजना बरसात तक सीमित रहेगी?

👉 गर्मी में किसान फिर किसके भरोसे रहेंगे?

असल हितग्राही बाहर,ठेकेदार अंदर!

योजना के दस्तावेज़ों में तकनीकी स्वीकृति, टेंडर प्रक्रिया और भुगतान की शर्तों पर तो विस्तार से लिखा है, लेकिन किसान की भूमिका, जिम्मेदारी और भागीदारी पर चुप्पी साध ली गई है।

किन किसानों को पानी मिलेगा-स्पष्ट सूची नहीं

  • जल वितरण का नियंत्रण किसके पास होगा — तय नहीं
  • पाइपलाइन टूटने या सिस्टम खराब होने पर मरम्मत कौन करेगा — जवाब नहीं
  • यानी योजना ऐसी,जिसमें ठेकेदार सुरक्षित है, अधिकारी संरक्षित हैं,और किसान सिर्फ़ दर्शक।

गौठानों में लगे सोलर पैनल: सबक जो सरकार भूल गई- यह पहली बार नहीं है जब सौर ऊर्जा के नाम पर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हों।

पिछले कार्यकाल में गौठानों में क्रेडा विभाग द्वारा लगाए गए सोलर पैनल आज जंग खा रहे हैं।

स्थानीय स्थिति यह है कि:

  • कई गौठानों में एक भी सोलर सिस्टम चालू नहीं
  • पैनल लगे हैं, पर इन्वर्टर खराब
  • रखरखाव की कोई व्यवस्था नहीं
  • न पंचायत जिम्मेदार, न विभाग

तो सवाल सीधा है—

👉 जब गौठानों जैसे सीमित और नियंत्रित स्थानों पर सोलर सिस्टम नहीं चल पाए,

  • तो सैकड़ों हेक्टेयर में फैली सिंचाई योजना कैसे सफल होगी?
  • क्या यह योजना भी भविष्य में “खण्डहर” बनेगी?

आज सरकार करोड़ों रुपये की नई योजना ला रही है, लेकिन पुरानी असफल योजनाओं का कोई ऑडिट नहीं किया गया।

  • न गौठान सोलर सिस्टम की समीक्षा
  • न दोषियों की जवाबदेही
  • न सीख लेकर नई योजना का डिज़ाइन

इससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि यह योजना किसानों के लिए नहीं, बल्कि भुगतान निकालने का माध्यम बनकर रह जाएगी।

जनहित में उठते सवाल

  • क्या गर्मी में अरपा नदी से पानी मिलेगा?
  • किन किसानों को वास्तविक लाभ मिलेगा?
  • संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी होगी?
  • यदि योजना विफल हुई तो जवाबदेह कौन होगा?
  • गौठान सोलर फेल होने पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?

सौर सूक्ष्म सिंचाई योजना अगर ज़मीन की सच्चाई से जुड़ी नहीं,तो यह किसानों के लिए नहीं,

बल्कि ठेकेदारों और अफसरशाही के लिए एक और “सुनहरा अवसर” साबित होगी।

अब ज़रूरत है कि शासन-प्रशासन प्रचार से बाहर निकलकर ज़मीनी जवाब दे,वरना यह योजना भी आने वाले समय में

“काग़ज़ों में सफल,खेतों में असफल” कहलाएगी।

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