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भू-माफिया पर शिकंजा कसने एंटी भू-माफिया एक्ट की उठी मांग.. एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के बाद जमीन घोटालों पर सख्त कानून की जरूरत

 

भू-माफिया पर शिकंजा कसने एंटी भू-माफिया एक्ट की उठी मांग

एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के बाद जमीन घोटालों पर सख्त कानून की जरूरत

रायपुर । प्रदेश में अवैध कब्जे, जमीन खरीदी-बिक्री में धोखाधड़ी और भू-माफियाओं के बढ़ते आतंक पर लगाम लगाने के लिए एंटी भू-माफिया एक्ट लागू करने की मांग तेज हो गई है। बुधवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में शासन ने मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश के 10 जिलों में जिला स्तरीय एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के गठन को मंजूरी दी है।

इसके लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के मुख्य बजट में 100 नए पदों को स्वीकृति दी गई है। यह टास्क फोर्स रायपुर, महासमुंद, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर, सरगुजा, कबीरधाम, जशपुर, राजनांदगांव और कोरबा जिलों में गठित की जाएगी।

जनता से रिश्ता से बातचीत में भू-माफियाओं से पीड़ित लोगों और सामाजिक जिम्मेदार नागरिकों ने कहा कि सरकार की यह पहल नशे पर नियंत्रण के लिए सराहनीय है, लेकिन इसी तर्ज पर भू-माफियाओं के खिलाफ भी सख्त कानून बनाया जाना चाहिए।

भू-माफिया कानून न होने से बच निकलते हैं आरोपी

वर्तमान में प्रदेश में कोई विशेष एंटी भू-माफिया एक्ट नहीं होने के कारण अवैध कॉलोनियां बसाने वाले, फर्जी दस्तावेजों से जमीन बेचने वाले और सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले माफिया अक्सर कानूनी कार्रवाई से बच निकलते हैं, जबकि आम जनता वर्षों तक अदालतों के चक्कर काटने को मजबूर हो जाती है।

बुलडोजर एक्शन से नहीं मिल रहा पीड़ितों को न्याय

पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन द्वारा की जाने वाली बुलडोजर कार्रवाई से उन्हें कोई वास्तविक न्याय नहीं मिलता, क्योंकि अवैध निर्माण आम जनता की मेहनत की कमाई से ही हुआ होता है। ऐसे मामलों में बिल्डर या भूमाफिया फरार हो जाते हैं और खरीदार अपने पैसे की वापसी के लिए संघर्ष करता रहता है। जबहार क्षेत्र में हुए एक मामले का उदाहरण देते हुए लोगों ने बताया कि कार्रवाई के बावजूद पीड़ितों को अब तक पूरा न्याय नहीं मिल पाया है।

स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की तर्ज पर भू-माफिया टास्क फोर्स की मांग

हाल ही में कैबिनेट ने पुलिस मुख्यालय की विशेष शाखा के अंतर्गत स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के गठन के लिए भी 44 नए पदों को मंजूरी दी है, जो आतंकी हमले या गंभीर सुरक्षा खतरे की स्थिति में त्वरित कार्रवाई करेगा। इसी तरह तहसील, राजस्व और नगर निगम स्तर पर एंटी बिल्डर/एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स के गठन की मांग भी उठ रही है।

उत्तर प्रदेश मॉडल अपनाने की सलाह

पीड़ितों ने सुझाव दिया कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर एंटी-भू-माफिया एक्ट और पोर्टल लागू किया जाए, जहां सरकारी व निजी जमीनों की पहचान कर शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई होती है। इससे अवैध कब्जों, धोखाधड़ी और जमीन हड़पने जैसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

लोगों का कहना है कि एंटी भू-माफिया एक्ट लागू होने से न सिर्फ भूमाफियाओं पर सख्त कार्रवाई होगी, बल्कि आम जनता की जीवनभर की गाढ़ी कमाई भी सुरक्षित रह सकेगी।

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