20 साल का सूखा,सिस्टम की प्यास नहीं बुझी: धामनपुरी की महिलाएं आज़ादी के 78 साल बाद भी सिर पर ढो रही हैं पानी
धामनपुरी (बड़े राजपुर)।
देश अमृतकाल मना रहा है, सरकारें जल जीवन मिशन की सफलता के दावे कर रही हैं, लेकिन विकासखंड बड़े राजपुर की ग्राम पंचायत धामनपुरी का अटल चौक क्षेत्र आज भी प्यासा है। यहां के ग्रामीणों—खासतौर पर महिलाएं और बच्चियां—पिछले 20 वर्षों से रोजाना लगभग एक किलोमीटर पैदल चलकर सिर पर पानी ढोने को मजबूर हैं। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक असंवेदनशीलता और जनप्रतिनिधियों की विफलता का जीता-जागता उदाहरण है।
महिलाओं की ज़िंदगी पानी के बोझ तले दबी
धामनपुरी में महिलाओं की सुबह पानी की तलाश से शुरू होती है और शाम उसी थकान के साथ खत्म होती है। भारी मटके, टूटते घुटने, झुकती कमर और फिर भी कोई विकल्प नहीं।
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि पानी ढोते-ढोते कई महिलाएं बीमार हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। बच्चियों की पढ़ाई और महिलाओं का स्वास्थ्य—दोनों इस जल संकट की भेंट चढ़ चुके हैं।
20 साल में एक भी स्थायी समाधान नहीं
ग्रामीणों का आरोप है कि बीते दो दशकों में न जाने कितने अधिकारी आए-गए, कितने वादे हुए, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं।
- गांव के हैंडपंप महीनों से खराब पड़े हैं,
- पाइपलाइन योजना कागजों में ही दम तोड़ चुकी है,
- टैंकर व्यवस्था दिखावे तक सीमित है।
ग्रामीणों का सीधा सवाल है—अगर 20 साल में भी पीने का पानी नहीं मिल सका, तो फिर विकास की बातें किसके लिए हैं?
- चुनाव आते ही याद आता है गांव
ग्रामीणों का आरोप है कि हर चुनाव में गांव नेताओं को याद आ जाता है, वादों की बाढ़ आ जाती है, लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म होते हैं, पानी की एक-एक बूंद के लिए महिलाएं फिर सड़कों पर भटकने को मजबूर हो जाती हैं।
- जनप्रतिनिधियों पर सीधा आरोप
सरपंच प्रतिनिधि पुलिसिंग नेताम द्वारा टैंकर से अस्थायी पानी आपूर्ति की बात कही जा रही है, लेकिन ग्रामीण इसे सिर्फ खानापूर्ति और आंखों में धूल झोंकने की कोशिश बता रहे हैं।
उपसरपंच प्रभुलाल मरकाम सहित अन्य जनप्रतिनिधियों से भी ग्रामीणों ने सवाल किया है कि जब मूलभूत सुविधा नहीं दिला सके, तो प्रतिनिधित्व किस बात का...?
- अब आर-पार की चेतावनी
ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे, प्रशासनिक दफ्तरों का घेराव करेंगे और इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
- प्रभावित ग्रामीणों ने खोला मोर्चा
पुलिसिंग नेताम (सरपंच प्रतिनिधि), प्रभुलाल मरकाम (उपसरपंच), दयाराम राठोर, सोनसाय नेताम, हरदास नेताम, सियाराम नेताम, चिंडगु नेताम, पिली नेताम, फुलबत्ती नेताम, बत्ती बाई मरकाम, सोमारी नेताम, शिलाबाई नेताम, देवन्तीन नेताम, प्रमिला नेताम, चैती बाई नेताम, सुरज बाई नेताम, देशों बाई, राधा नेताम, आसमती नेताम, मनोबाई नेताम, मानबाई नेताम, बिजोन नेताम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण।














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