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धान खरीदी का संकट: किसान मुद्दा या राजनीतिक अवसर,समय सीमा बढ़ेगी या राजनीति हावी रहेगी?

 धान खरीदी का संकट: किसान मुद्दा या राजनीतिक अवसर,समय सीमा बढ़ेगी या राजनीति हावी रहेगी?

(विशेष संपादकीय)

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के अब केवल कुछ दिन शेष हैं, लेकिन हजारों किसान अब भी अपना धान बेचने से वंचित हैं। यह संकट अब केवल प्रशासनिक समस्या नहीं रहा, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।

धान खरीदी केंद्रों पर किसानों की भीड़ और बेचैनी के बीच विपक्ष को एक बड़ा अवसर दिखने लगा है। विपक्ष खुद को किसानों का हितैषी बताकर अब खुले तौर पर धान खरीदी की समय सीमा बढ़ाने की मांग कर रहा है।

  लेकिन सवाल यह है कि क्या यह मांग वास्तव में किसानों के लिए है या राजनीति के लिए?  

विपक्ष को मिला मुद्दा, सरकार पर बढ़ा दबाव

  विपक्ष की रणनीति साफ है  

धान खरीदी की अव्यवस्था को हथियार बनाकर सरकार को घेरना और किसानों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना।

आज विपक्ष कह रहा है —

  • समय सीमा बढ़ाई जाए
  • किसानों को राहत दी जाए
  • सरकार विफल रही है

यह मांग जनता के सामने सरकार को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास भी है।

सत्ता पक्ष की दुविधा: राहत दें या विपक्ष को श्रेय न मिले?

सरकार के सामने सबसे बड़ी दुविधा यह है कि —

  • यदि समय सीमा बढ़ाई गई, तो विपक्ष इसे अपनी जीत बताएगा।
  • यदि समय सीमा नहीं बढ़ाई गई, तो किसान नाराज होंगे और सरकार की छवि खराब होगी।

यही राजनीति का सबसे कड़वा सच है 

  • कई बार निर्णय किसान के लिए नहीं, श्रेय-अपश्रेय के लिए लिए जाते हैं।
  • किसान को राजनीति से फर्क नहीं पड़ता

धान बेचने के लिए लाइन में खड़ा किसान यह नहीं सोचता कि —

  • विपक्ष क्या कह रहा है
  • सरकार क्या सोच रही है
  • उसकी चिंता सिर्फ इतनी है कि —

“मेरा धान बिकेगा या नहीं?”

किसान के लिए यह मुद्दा जीवन का है, राजनीति का नहीं।

  क्या सरकार विपक्ष की मांगों को नजरअंदाज करेगी...?  

सरकार के पास अब दो रास्ते हैं 

पहला रास्ता:

विपक्ष की मांग को नजरअंदाज कर कोई वैकल्पिक व्यवस्था तलाशना,

जैसे अतिरिक्त केंद्र, विशेष खरीदी अभियान या अन्य समाधान

दूसरा रास्ता:

  • समय सीमा बढ़ाकर किसानों को राहत देना,
  • भले ही विपक्ष इसे राजनीतिक जीत बताए।

लेकिन सच्चाई यह है कि

यदि हजारों किसानों का धान नहीं खरीदा गया,

तो इसका खामियाजा सत्ता को ही भुगतना पड़ेगा।

  राजनीति बाद में, किसान पहले  

धान खरीदी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सरकार और विपक्ष दोनों को यह समझना होगा कि —

  • यह श्रेय लेने का मंच नहीं।
  • किसानों को राहत देने का समय है।
  • यदि सरकार किसानों के लिए समय सीमा बढ़ाती है,तो इसे विपक्ष की जीत नहीं,
  • राज्य के किसानों की जरूरत माना जाना चाहिए।

  अब बड़ा सवाल यही है —  

  • क्या सत्ता पक्ष किसानों के हित में समय सीमा बढ़ाएगा?
  • या विपक्ष को अवसर न मिले, इस डर से किसानों को संकट में छोड़ देगा?
  • क्योंकि यदि किसान का धान नहीं बिका,    
  • तो नुकसान केवल किसान का नहीं होगा —लोकतंत्र की भरोसे की नींव भी कमजोर होगी

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