करोड़ों खर्च के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की हालत बत्तर,गुणवत्ता पर उठने लगे हैं सवाल,संबंधित अधिकारी बने हैं मुकदर्शक...
मुंगेली//छत्तीसगढ़ -कहा जाता है क्षेत्र के विकास में सड़कों की मुख्य भूमिका होती है,इसलिए शासन ने सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों को कस्बों से जोड़ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की शुरुआत की थी,इसके अंतर्गत अंतिम छोर तक सड़कें बनाई जा रही है। जिसका अच्छा प्रभाव भी रहा जिसकी बदौलत अत्यंत पिछड़े क्षेत्र के ग्रामीण का नाता कस्बों से जुड़ गया है और अब छोटी-छोटी जरूरतों के लिए जुझना नहीं पड़ रहा है।
परंतु कुछ भ्रष्ट ठेकेदार व संबंधित अधिकारी अधिक पैसे कमाने के लालच में स्तरहीन निर्माण कराकर उक्त योजना की धज्जियां उड़ा रहें हैं। जिसका उदाहरण मुंगेली जिले ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित सड़कों को दिया जा सकता है। ये हाल केवल मुंगेली जिले का नहीं अपितु प्रदेशभर की सड़कों का यही हाल है,जिस पर अंकुश लगाना अत्यंत आवश्यक है,यदि ऐसा ही चलता रहा तो शासन प्रशासन की मंशा धरी की धरी रह जायेगी और निर्माण के नाम पर संबंधित ठेकेदार व भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारी सारा मलाई डकार जायेंगे और योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जायेगी।
सड़कों की जाल बिछाने का दावा:-
शासन-प्रशासन ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की जाल बिछाने का दावा कर रही है,शासन प्रशासन का कहना भी जायज है क्योंकि सड़के तो बनी है और लोगों का आवागमन भी जारी है। परंतु ये सब कागजों पर हो रहा है ऐसा नहीं कि यहां सड़कों का निर्माण नहीं हुआ है,निर्माण हुए हैं पर स्तरहीन जिसके चलते सड़कें समय से पहले जर्जरता की भेंट चढ़ जाती है और बचा खुचा कसर बड़े वाहन पुरी कर देतें हैं जो कि ओवरलोड चक्कर में सड़कों की हालत खराब कर देती है। वहीं संबंधित ठेकेदार/एजेंसी द्वारा मेंटेनेंस के नाम पर गढ्ढों में केवल गिट्टी डाल दी जाती है। जहाँ गिट्टी डलने के बाद पक्की सड़कें,कच्ची सड़कों से भी बत्तर हो जाती है जहाँ चलना खतरों से खाली नहीं। इसके बाद भी इस पर न कोई स्थानीय जनप्रतिनिधी आवाज उठाता है और प्रशासनिक अधिकारी इस ध्यान देते हैं। इस तरह शासन के करोड़ों रूपये भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है।
मेंटेनेंस के नाम पर छलावा :-
वैसे तो सड़क निर्माण पूर्ण के बाद पांच साल तक मेंटेनेंस की जिम्मेदारी संबंधित निर्माण एजेंसी की होती है। जिसके लिए वर्षवार बकायदा राशि भी निर्धारित की जाती है और उक्त राशि को निकालने संबंधित एजेंसी महज सड़क मरम्मत के नाम पर औपचारिक्ताऐं पुरी करती है और गलत तरिके से राशि निकाल डगार लेते हैं। इस खेल में केवल ठेकेदार ही नहीं अपितु संबंधित अधिकारी कर्मचारी भी संलिप्त रहतें हैं।
सड़कों की मरम्मत को लेकर ग्रामीण पस्त :-
सड़कों की मरम्मत को लेकर ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों से कई बार मांग कर चुके हैं,इसके बाद भी आश्वासन के अलावा कुछ नहीं होता। वहीं जब कभी क्षेत्र में बड़े नेता की सिरकत होती है तो सड़कें एक ही रात में चकाचक हो जाती है जो कुछ ही दिनों बाद फिर जर्जर तब्दील हो जाती है। और इस तरह ग्रामीणों की जीवन बदहाल हो जाती है लेकिन शासन के रिकॉर्ड में विकास जोरों पर है।















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